हम क्यों मनाते हैं बाल दिवस ? | Happy Children Day 2017

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Monday, 17 July 2017

गर्भावस्था के दौरान अपनाएं यह डाइट चार्ट:

गर्भावस्था के दौरान अपने डायट चार्ट में जरूरी पोषक तत्वों को करें शामिल |
● गर्भवती होने के बाद नियमित व्यायाम अवश्य करें, इससे फिटनेस बनी रहती है।
● प्रेग्नेंट महिला को गर्भधारण के बाद 300 अतिरिक्त कैलोरी की होती है जरूरत।
● अपने आहार में प्रोटीन, विटामिन, आयर, कैल्शियम आदि जरूर शामिल कीजिए।
● ज्यादा भार न उठायें, ज्यादा काम करने से बचें और भरपूर आराम जरूर करें।


Diet chart during pregnancy month by month in Hindi:


● गर्भावस्था का समय महिलाओं के लिए आम तौर पर मिले-जुले अनुभव लेकर आता है, कभी उन्हें आने वाले शिशु की चिंता सताती है। इस दौरान आपको होने वाले बच्चे का भी ध्यान रखना पड़ता है। यदि आपने खान-पान या नियमित होने वाली जांच में अनियमितता बरती तो यह आप और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदेह हो |

● तो कभी यह अनुभव उनके लिए सुखदायी होता है। चिकित्सकों के परामर्श अनुसार महिलाएं आजकल आराम पर भी ध्यान देती हैं, लेकिन व्यायाम पर ध्यान नहीं देतीं। 

स्वस्थ व सुरक्षित गर्भावस्था में व्यायाम भी उतना ही आवश्यखक है, जितनी दूसरी बातें। आइए हम आपको उचित और अनुचित के बारे में जानकारी दे रहे हैं।


गर्भावस्था में देखभाल:

1) व्यायाम करें :
गर्भवती होने के बाद यदि आप नियमित व्यायाम कर रही हैं तो इससे आप न केवल फिट रहेंगी बल्कि सामान्य प्रसव की संभावना भी बढ़ेगी। इसलिए नियमित व्यायाम अवश्य करें, ज्यादा थकाऊ व्यायाम की जगह हल्के फुल्के व्यायाम ही करें। सैर करें, यह आसान भी है।

यदि आप गर्भावस्था से पहले से ही व्यायाम करती आ रही हैं, तो चिकित्सक और ट्रेनर से संपर्क के बाद ही व्यायाम की शुरूवात करें। व्यायाम करने से रक्त संचार सुचारु होता है, 

अंतिम चरण तक चलते-फिरने, उठने-बैठने में परेशानी नहीं होती, कब्ज़ की शिकायत दूर होती है और थकान भी कम होती है।

2) आपका खानपान :-

गर्भवती महिला को लगभग 300 अतिरिक्त कैलोरी की जरूरत होती है। इस दौरान आपको पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए, इसलिए अपने आहार में प्रोटीन, विटामिन, आयर, कैल्शियम आदि जरूर शामिल करें। यदि सुबह आपका जी मचलता है, तो पर्याप्त मात्रा में पानी पियें और थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कई बार खायें और अच्छी नींद लें। सुबह उठने के साथ ही नाश्ता ज़रूर करें।

3) इन बातों पर रखें नज़र :- 

● सुबह अचानक बिस्तर से ना उठें।
● आपकी त्वचा अत्यंत रूखी हो रही है, तो माश्चराइज़र का प्रयोग करें।
● कई महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान शरीर में दर्द की शिकायत रहती है, ऐसा होने पर सोने से पहले शरीर की मालिश करें।
● ज्यादा भार न उठायें, काम करने से बचें और आराम भरपूर करें।

गर्भावस्था के दौरान सर्वश्रेष्ठ भोजन:

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Friday, 14 July 2017

अनुलोम विलोम प्रणायाम करने से लाभ:

अनुलोम –विलोम प्रणायाम में सांस लेने व छोड़ने की विधि को बार-बार दोहराया जाता है। इस प्राणायाम को 'नाड़ी शोधक प्राणायाम' भी कहते है।


अनुलोम-विलोम प्रणायाम, जानें लाभ और करने की सही विधि:

● अनुलोम-विलोम को रोज करने से शरीर की सभी नाड़ियों स्वस्थ व निरोग रहती है। इस प्राणायाम को हर उम्र के लोग कर सकते हैं। वृद्धावस्था में अनुलोम-विलोम प्राणायाम योगा करने से गठिया, जोड़ों का दर्द व सूजन आदि शिकायतें दूर होती हैं।

Anulom-Vilom Pranayama Steps And Benefits

अनुलोम विलोम कसे करावे:

● दरी व कंबल स्वच्छ जगह पर बिछाकर उस पर अपनी सुविधानुसार पद्मासन, सिद्धासन, स्वस्तिकासन अथवा सुखासन में बैठ जाएं।
● फिर अपने दाहिने हाथ के अंगूठे से नासिका के दाएं छिद्र को बंद कर लें और नासिका के बाएं छिद्र से सांस अंदर की ओर भरे और फिर बायीं नासिका को अंगूठे के बगल वाली दो अंगुलियों से बंद कर दें। उसके बाद दाहिनी नासिका से अंगूठे को हटा दें और सांस को बाहर निकालें।
● अब दायीं नासिका से ही सांस अंदर की ओर भरे और दायीं नाक को बंद करके बायीं नासिका खोलकर सांस को 8 की गिनती में बाहर निकालें।
● इस क्रिया को पहले 3 मिनट तक और फिर धीरे-धीरे इसका अभ्यास बढ़ाते हुए 10 मिनट तक करें। 
● 10 मिनट से अधिक समय तक इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए।
● इस प्रणायाम को सुबह-सुबह खुली हवा में बैठकर करें।
लाभ :- 
1) इससे शरीर में वात, कफ, पित्त आदि के विकार दूर होते हैं।
2) रोजाना अनुलोम-विलोम करने से फेफड़े शक्तिशाली बनतेहैं।
3) इससे नाडियां शुद्ध होती हैं जिससे शरीर स्वस्थ, कांतिमय एवं शक्तिशाली बनता है।
4) इस प्रणायाम को रोज करने से शरीर में कॉलेस्ट्रोल का स्तर कम होता है।
5) अनुलोम-विलोम करने से सर्दी, जुकाम व दमा की शिकायतों में काफी आराम मिलता है।
6) अनुलोम-विलोम से हृदय को शक्ति मिलती है।
इस प्राणायाम के दौरान जब हम गहरी सांस लेते हैं तो शुद्ध वायु हमारे खून के दूषित तत्वों को बाहर निकाल देती है। शुद्ध रक्त शरीर के सभी अंगों में जाकर उन्हें पोषण प्रदान करता है।
7) अनुलोम-विलोम प्राणायाम सभी आयु वर्ग के लोग कर सकते हैं और सुविधानुसार इसकी अवधि तय की जा सकती है।
सावधानियां :- 
● कमजोर और एनीमिया से पीड़ित रोगियों को इस प्राणायाम के दौरान सांस भरने व छोड़ने में थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए।
● कुछ लोग समय की कमी के चलते जल्दी-जल्दी सांस भरने और निकालने लगते हैं। इससे वातावरण में फैला धूल, धुआं, जीवाणु और वायरस, सांस नली में पहुंचकर अनेक प्रकार के संक्रमण को पैदा कर सकते है।
● प्रणायाम के दौरान सांस की गति इतनी सहज होनी चाहिए। प्राणायाम करते समय स्वयं को भी सांस की आवाज नहीं सुनायी देनी चाहिए !

Saturday, 18 February 2017

बच्चा चाहती हैं सुंदर और स्वस्थ तो जरूर खाएं नारियल:

नारियल हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुता अच्‍छा माना जाता है। चाहे वह कच्‍चा हो पक्‍का हो या फिर वह नारियल का पानी ही क्‍यों न हो, इसके सेवन कई बीमारियों को दूर किया जा सकता है। नारियल पानी में फाइबर, मैगनीशियम, कैल्‍शिम, विटामिन सी आदि बहुत सारे पोषक तत्‍व होते हैं। 

कई महिलाओं में यह गलत धारणा है कि गर्भावस्‍था के दौरान गर्भवती महिलाओं को नारियल पानी नुक्‍सान कर सकता है। पर अगर आप गर्भवती हैं तो आपको खूब सारा नारियल खाना चाहिए। आइये जानते हैं कि नारियल खाने के फायदे क्‍या-क्‍या हैं।

नारियल के फायदे:

1.गर्भावस्‍था के दौरान महिलाओं के अंदर कई हारमोनल बदलाव आते हैं जिनसे उन्‍हें बहुत सारी तकलीफ तथा परेशानी का समना करना पड़ता है। पर नारियल खाने से महिलाएं इन समस्‍याओं और परेशानी को आराम से रोक सकती हैं।

2. नारियल गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद है क्योंकि नारियल में गर्भवती महिला और उसके बच्चे को पौष्टिकता देने की क्षमता है।

3.नारियल पानी पीने से पेशाब खुल कर होती है जिससे गर्भवती महिलाओं को मूत्र से संबधित सक्रंमण नहीं होगा। सिर्फ इतना ही नहीं पानी पीने से किडनी में स्‍टोन की भी कोई गुंजाइश नहीं होती। नारियल का पानी पीने से आपको पेशाब के दौरान होने वाली जलन से भी मुक्ति मिलेगी।

4.नारियल पानी कब्ज में राहत देता है, आंत से संबधित परेशानियों में सुधार करता है और पाचन स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है। नारियल पानी पीने के लिए उन लोगों को सलाह दी जाती है जो अल्‍सर या फिर एसिडिटी से पीडित हैं।

5.नारियरल में बिल्‍कुल भी वसा नहीं होता तथा यह जीरो कोलेस्ट्रोल लिए होता है। इसके सेवन से महिलाओं में एचडीएल कॉलेस्ट्रॉल बढ़ाने में मदद करता है जो कि अच्छा माना जाता है। साथ ही इसके पानी पीने से गर्भवती महिलाओं में कॉलेस्ट्रॉल को नियंत्रि‍त करने में मदद करता है।

6.गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को थकान और डीहाइड्रेशन की समस्या होने लगती है जिसे नारियल के सेवन से दूर किया जा सकता है।

7.नारियल के सेवन से इम्‍यून सिस्टम को मजबूत बनाया जा सकता है। गर्भावस्था के दौरान एचआईवी, फ्लू, दाद इत्यादि से नारियल के सेवन से बचा जा सकता है। 

दरअसल, नारियल में एंटी बैक्टीरियल, एंटी फंगल और एंटी वायरल तत्व पाए जाते हैं जो कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की रक्षा कर सकते हैं।

Friday, 17 February 2017

Home remedies for cough cold:

सर्दी, खांसी और जुखाम ये एक ही परिवार के रोग है और इनकी औषोधी भी लगभग एक है.
* आपको आसान से नुस्खे यहाँ बता रहा हूँ जिसे आप घर पे बनाये और एलोपेथी दवाओं के साइड इफेक्ट से भी बचे .

आयुर्वेदिक औषधियां घर पे बनाये :-

* ये एक अच्छी दवाई, खांसी ‪जुकाम‬ एलर्जी सर्दी आदि के लिए जिसे आप घर पर बना सकते है इसके लिए आपको चाहिए तुलसी के पत्ते, तना और बीज तीनो का कुल वजन 50 ग्राम इसके लिए आप तुलसी के ऊपर से तोड ले इसमें बीज तना और तुलसी के पत्ते तीनो आ जाएंगे |


इनको एक बरतन में डाल कर 500 मिलि पानी डाल ले और इसमें 100 ग्राम अदरक और 20 ग्राम काली मिर्च दोनो को पीस कर डाले और अच्छे से उबाल कर काढे और जब पानी 100 ग्राम रह जाए तो इसे छान कर किसी कांच की बोतल में डाल कर रखे इसमे थोडा सा शहद मिला कर आप इसके दो चम्मच ले सकते है दिन में 3 बार | 

* जुकाम के लिए 2 चम्मच अजवायन को तवे पर हल्का भूने और फ़िर उसे एक रूमाल या कपडे में बांध ले और पोटली बना ले उस पोटली को नाक से सूंघे और सो जाए.

* खांसी के लिए रोज दिन में 3 बार हल्के गर्म पानी में आधा चम्मच सैंधा नमक डाल कर गरारे करे सुबह उठ कर दोपहर को और फ़िर रात को सोने से पहले एक चम्मच शहद में थोडी सी पीसी हुई काली मिर्च का पाऊडर डाल कर मिलाए और उसे चाटे अगर खासी ज्यादा आ रही हो तो 2 साबुत काली मिर्च के दाने और थोडी सी मिश्री मुंह में रख कर चूसे आपको आराम मिलेगा.

*गले की खराश, या गले मे किसी भी प्रकार का इन्फेक्शन हो, गला बैठ गया है, पानी पिने मे भी तकलीफ हो रही है, लार निकलने मे भी तकलीफ हो रही है, आवाज भरी हो गयी है .. इन सबके लिए एक ग्लास देशी गाय का दूध, एक चम्मच देशी गाय का घी और चौथाई चम्मच हल्दी को मिलाके कुछ देर उबालना है फिर उसको सिप सिप करके चाय की तरह पीना है शाम को एकबार | 

एक और प्रस्तुत है खांसी की अचूक दवा:-
* कई बार खांसते-खांसते हम परेशान हो जाते हैं। दवाएं काम नहीं करती हैं।
* गर्भवती महिलाओं के लिए दो एलोपैथिक दवाएं लेना निराप्रद नहीं माना गया है।
* वहीं शल्य-चिकित्सा कराने वाले रोगियों के लिए ज्यादा देर तक खांसना बिल्कुल ही सेहतमंद नहीं होता है। गले में खरास किच-किच जैसी कुछ होती है।
* ऐसे में एक आसान औषधि, जो हमने स्वयं ही अत्यंत विषम परिस्थिति में आजमाया था आप अगर मुश्किल में हैं तो आजमाइये और अपना अनुभव जरूर बताएं।
दालचीनी- थोड़ी मात्रा( लगभग एक ग्राम )
शहद- आधा चम्मच
प्रयोग विधि;--
* दालचीनी को पूरी तरह पीसकर पाउडर बना लें। बायीं हाथ की हथेली पर करीब आधा चम्मच शहद लेकर उसके ऊपर दालचीनी (दो चुटकी भर) डालें और दायें हाथ की अंगुली से अच्छी तरह मिलाएं और उसे चाट जाएं।

परिणाम;--
* दो से तीन मिनट में खांसी जाती रहेगी। दोबारा खांसी हो तो इस प्रयोग को दोबारा आजमा सकते हैं।
* अगर दही खाते है तो उसे बंद करदे और रात को सोते समय दूध न पिए
* तुलसी, काली मिर्च और अदरक की चाय खांसी में सबसे बढि़या रहती हैं।
* हींग, त्रिफला, मुलहठी और मिश्री को नीबू के रस में मिलाकर लेने से खांसी कम करने में मदद मिलती है।
* पीपली, काली मिर्च, सौंठ और मुलहठी का चूर्ण बनाकर चौथाई चम्मच शहद के साथ लेना अच्छा रहता है।

आयुर्वेदिक उपचार खांसी जुकाम एलर्जी सर्दी:

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Saturday, 26 November 2016

Kapalbhati Kaise Kare Aur Uske Fayde:

▪ कपालभाती प्राणायाम को जीवन की संजीवनी कहा जाता है।
▪ कपालभाती प्राणायाम को हठयोग में शामिल किया गया है।
▪ सांसों को अंदर-बाहर धक्का देना होता है, सांस लेने से बचें।


▪ इससे चेहरे पर चमक आती है और शरीर निरोग रहता है।
● योग की हर क्रिया कारगर होती है, लेकिन बात जब कपालभाती प्राणायाम की होती है तो इसे जीवन की संजीवनी कहा जाता है। कपालभाती प्राणायाम को सबसे कारगर माना जाता है। 

कपालभाती प्राणायाम को हठयोग में शामिल किया गया है। योग के आसनों में यह सबसे कारगर प्राणायाम माना जाता है। यह तेजी से की जाने वाली एक रोचक प्रक्रिया है। दिमाग आगे के हिस्‍से को कपाल कहते हैं और भाती का अर्थ ज्योति होता है।
 

कपालभाती प्राणायाम करने के सही तरीके और इससे होने वाले फायदों के बारे में हम आपको बताते हैं।

कैसे करें यह आसान :- 
कपालभाती प्राणायाम करने के लिए सिद्धासन, पद्मासन या वज्रासन में बैठकर सांसों को बाहर छोड़ने की क्रिया करें। सांसों को बाहर छोड़ने या फेंकते समय पेट को अंदर की तरफ धक्का देना है। 

ध्यान रखें कि सांस लेना नहीं है क्योंकि उक्त क्रिया में सांस अपने आप ही अंदर चली जाती है। कपालभाती प्राणायाम करते समय मूल आधार चक्र पर ध्यान केंद्रित करना होता है। 

इससे मूल आधार चक्र जाग्रत होकर कुं‍डलिनी शक्ति जागृत होने में मदद मिलती है। कपालभाती प्राणायाम करते समय ऐसा सोचना है कि हमारे शरीर के सारे नकारात्‍मक तत्व शरीर से बाहर जा रहे हैं।

इस आसन के फायदे :- 
यह प्राणायाम आपके चेहरे पर कांति यानि चमक लाता है। इससे दांतों और बालों के सभी प्रकार के रोग दूर हो जाते हैं। शरीर की अतिरिक्‍त चर्बी कम होती है खासकर पेट की, यानी यह वजन कम करने में भी कारगर आसन है। इसे अलावा इसके नियमित अभ्‍यास करने से कब्ज, गैस, एसिडिटी जैसी पेट से संबंधित समस्या भी दूर हो जाती है।

कपालभाती प्राणायाम का सबसे ज्याद प्रभाव पड़ता है शरीर और मन पर, क्‍योंकि यह मन से नकारात्‍मक तत्‍वों को दूर कर सकारात्‍मकता लाता है। थायराइड, चर्म रोग, आंखों की समस्‍या, दांतों की समस्‍या, महिलाओं की समस्‍या, डायबिटीज, कैंसर, हीमोग्‍लोबिन का स्‍तर सामान्‍य करना, किडनी को मजबूत बनाने जैसे सभी तरह की समस्‍याओं को दूर करने की क्षमता होती है। यानी यह एक ऐसा आसन है जो सभी तरह की समस्‍याओं का उपचार करता है।

थोड़ी सावधानी :- 
कपालभाती व्‍यायाम सभी आयु वर्ग के लोग कर सकते हैं, लेकिन जिन लोगों को सांस संबंधी समस्‍या हो उनको चिकित्‍सक की सलाह के बाद ही यह आसन करना चाहिए।

कपालभाती आसन एक ऐसा आसन है जिसमें सभी योगासनों का फायदा मिलता है। इसलिए इसे अपनी दिनचर्या बनायें और निरोग रहें।

कपाल भाती प्राणायाम के लाभ
1) बालो की सारी समस्याओँ का समाधान प्राप्त होता है|
2) चेहरे की झुरीयाँ,आखो के निचे के डार्क सर्कल मिट जयेंगे|
3) थायराँइड की समस्या मिट जाती है|
4) सभी प्रकारके चर्म समस्या मिट जाती है|
5) आखो की सभी प्रकारकी समस्या मिट जाती है,और आखो की रोशनी लौट आती है|
6) दातों की सभी प्रकारकी समस्या मिट जाती है, और दातों की खतरनाक पायरीया जैसी बीमारी भी ठीक हो जाती है|
7) कपालभाती प्राणायाम से शरीर की बढी चर्बी घटती है, यह इस प्राणायाम का सबसे बडा फायदा है|
8) कब्ज, सीडिटी, गँस्टीक जैसी पेट की सभी समस्याएँ मिट जाती हैं |
9) युट्रस(महीलाओ) की सभी समस्याओँ का समाधान होता है|
10) डायबिटीस संपूर्णतया ठीक होता है| कोलेस्ट्रोल को घटाने में भी सहायक है| सभी प्रकार की एलरजियाँ मिट जाती है|
11) सबसे खतरनाक कँन्सर रोग तक ठीक हो जाता है ।
12) शरीर में स्वतः हिमोग्लोबिन तैयार होता है|
13) शरीर मे स्वतः कँल्शीयम तैयार होता है| किडनी स्वतः स्वच्छ होती है, डायलेसिस करने की जरुरत नहीं पडती

Friday, 25 November 2016

कई ऐसी माएं हैं जो कम दूध होने की वजह से अपने बच्चे को स्तनपान नहीं करा पाती हैं। पारंपरिक रूप से बच्चे के जन्म के बाद, नयी माँ का दूध उतरने के लिए अनुकूल भोजन प्रदान किया जाता है। आज के पोस्ट में, मैं आपको दूध बढ़ाने के लिए १५ सर्वोत्तम आहारों के बारे में बताने वाली हूँ। इन्हें ‘गैलेक्टोगॉग्स’ के रूप में जाना जाता है।


१. लहसुन
लहसुन चावल, लहसुन की चटनी, भुना हुआ लहसुन, लहसुन रसम, तिल के तेल में छौंके हुए लहसुन के रूप में लहसुन के सेवन से माँ का दूध बढ़ने में मदद मिलती है। यदि आपका बच्चा चिड़चिड़ा है तो इसे कम मात्रा में लें। लहसुन पाचन तंत्र की सुचारु क्रियाशीलता में सहायता करता है, गैस दूर करता है और खमीर संक्रमण या छाले से बचाता है।

२. मेथी
मेथी में फायटोएस्ट्रोजन पाया जाता है जो एस्ट्रोजन के समान रसायन होता है। इसमें मौजूद एक प्रमुख तत्व डिओसजेनिन स्तन का दूध बढ़ाने करने में कारगर साबित हुआ है। इसे डोसा/चाय के रूप में लिया जा सकता है या पानी के साथ साबुत निगला जा सकता है। इसे बहुत प्राचीन समय से नयी माँओं के द्वारा प्रयोग किया जाता रहा है। मेथी के दाने आयरन, कैल्शियम, विटामिन और मिनरल से भरपूर होते हैं।

पढ़ें: गर्भावस्था का ९वां महीना Increase Lactation In New Moms
३. दूध
दूध स्तनपान के दौरान माँ के शरीर से समाप्त होने वाले कैल्शियम की भरपाई करने में सहायता करता है, हाइड्रेट करता है और दूध बढ़ाने में भी मदद करता है।
४. सैजन की पत्तियां
केरल में नयी माँओं को भुजिया/सब्जी के रूप में सैजन की पत्तियां दी जाती हैं। यह दूध का उत्पादन बढ़ाने में सहायता करता है।
५. ब्राउन राइस
यह एक अन्य सर्वोत्तम आहार है जो पर्याप्त दूध उत्पादित कर सकता है। Increase Lactation In New Moms
६. जई
जई में प्रचुर मात्रा में फाइबर मौजूद होता है और यह दूध के उत्पादन में भी सहायता करता है। नयी माँ के खानपान में जई को प्रतिदिन शामिल किया जा सकता है।
७. पालक
आयरन से भरपूर पालक दूध का उत्पादन बढ़ाने में भी सहायता कर सकता है।
८. मछली
मेरा पसंदीदा! सार्डिन और सामन नयी माँओं का दूध बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। इसे करी/काली मिर्च पाउडर के साथ तलकर/ग्रिल के रूप में लिया जा सकता है। मछली को पूर्व प्रसव आहार में भी शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि इसे बच्चों के दिमाग के विकास के लिए अच्छा माना जाता है। Increase Lactation In New Moms

९. लौकी
दूधी या लौकी भी सहायता करता है। लौकी की प्रजाति की सभी सब्जियां दूध के उत्पादन में वृद्धि करती हैं। लौकी को सब्जी, भुजिया, हलवा, खीर आदि के रूप में लिया जा सकता है।
१०. पानी
बहुत सारा पानी हाइड्रेशन में सहायता करता है और नयी माँओं के दूध उत्पादन को बढ़ाता है। प्रत्येक बार स्तनपान कराने से पहले और बाद में माँ को एक गिलास फल का रस या पानी लेना चाहिए।
११. चना
हल्की करी/हमस के रूप में चने का प्रयोग भी किया जा सकता है। प्राचीन मिस्र काल से इसका प्रयोग स्तनपान कराने वाली माँओं के द्वारा किया जाता रहा है।
१२. बादाम
बादाम प्रोटीन और विटामिन ई का प्रचुर स्त्रोत होता है जो दूध उत्पादन में भी सहायता करता है। नयी माएं रात भर भिगाकर रखे गए ३-५ बादाम ले सकती हैं।
पढ़ें: स्ट्रेच मार्क्स के लिए पमार्स कोको बटर फॉर्मूला मसाज क्रीम
१३. तिल का तेल और घी
केरल में, नयी माँओं के लिए भोजन केवल तिल के तेल में तैयार किया जाता है। इसे नयी माँओं में दूध का उत्पादन बढ़ाने वाला माना जाता है। घी पर्याप्त पौष्टिक तत्व प्रदान करता है और हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायता करता है। यह माँ के दूध के लिए प्रेरक के रूप में भी कार्य करता है। Increase Lactation In New Moms

१४. तिल
तिल में कैल्शियम की उच्च मात्रा मौजूद होती है और यह माँ को बच्चे को अच्छी प्रकार से स्तनपान कराने में सहायता करता है। इसे लड्डू/ चटनी/ साबुत पानी के साथ लिया जा सकता है।
१५. सोआ बीज, अजवाइन/जीरा और सौंफ भी दूध बढ़ाने वाले आहार हैं।

Thursday, 24 November 2016

चाहती हैं नॉर्मल डिलीवरी तो करें ये उपाय:

नार्मल डिलिवरी सिजेरियन डिलिवरी से ज्यादा सही होती है। क्योंकि सिजेरियन डिलिवरी करवाने पर स्ट्रैच मार्क्स आते है। साथ ही सिजेरियन डिलिवरी के बाद कई बातों का ध्यान रखना पड़ता है। जबकि नार्मल डिलिवरी में ऐसी कोई भी बड़ी समस्या नहीं आती। इसलिए ज्यादातर गर्भवती महिलाएं सिजेरियन डिलिवरी नहीं, बल्कि नार्मल डिलिवरी करवाना पसंद करती हैं।

चाहती हैं नॉर्मल डिलीवरी तो करें ये उपाय  

Pregnancy Tips For Normal Delivery in Hindi:

कैसे हो नार्मल डिलिवरी
1) अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें
बच्चे को जन्म देते वक्त आपको बेहद पीड़ा सहनी होती है और यह आसान नहीं होता। अगर आप कमजोर हैं और आप में खून की कमी है तो आपके लिए यह काफी मुशकिल होगा। इसलिए अपने स्वास्थ्य का पूरा-पूरा ध्यान रखें। ताकि आपको उस वक्त कम से कम तकलिफ हो।

2) अच्छा भोजन करें
गर्भवस्था के दौरान आपने डॉक्टर के कहे अनुसार ही भोजन करें। नार्मल डिलिवरी में आपके शरीर से दो से तीन चार सौ एम.एल. ब्लड जाता है। इसलिए ताकत और पोषण के लिए खाने में ज्यादा से ज्यादा पोषक तत्व खाएं। प्रेगनेंसी में आयरन और कैल्शियम की बहुत जरुरत पड़ती है इसलिए जितना भी हो सके अपने आहार में इसे जरुर शामिल करें।

Five Easy Tips for Normal Delivery in Hindi:


3) शरीर में पानी की कमी से बचें
आपके गर्भाशय में शिशु एक तरल पदार्थ से भरी हुई झोली एमनियोटिक फ्लयूड में रहता है। जिससे बच्चे को ऊर्जा मिलती है। इसलिए आपके लिए रोजाना 8 से 10 गिलास पानी पीना बहुत जरुरी है। इससे आपके शरीर में पानी की कमी नहीं होती।

4) पैदल चलें और टहलते रहें
गर्भवति महिलाओं के लिए आराम जरूरी है, लेकिन इसका अर्थ अपने काम से जी चुराना नहीं है। कोशिश करें आपकी रोजमर्रा की जिंदगी में ज्यादा फर्क न आए। दफ्तर और घर के काम सामान्य रूप से ही करती रहें। पैदल चलना और टहलना आपके लिए अच्छा रहेगा। बाजार तक जाना हो तो कार या किसी वाहन के स्थान पर पैदल ही जाएं तो बेहतर। ऑफिस में भी जरा घूम-फिर लिया कीजिए।

5) एक्ससाइज
अगर आप प्रेगनेंट होने के पहले से ही रोजाना एक्ससाइज करती आ रहीं हैं, तो नार्मल डिलिवरी होने के चांस बढ़ जाते हैं। गर्भवस्था के दौरान आप कोई फिटनेस सेंटर ज्वाइंन कर सकती है, जो आपकी मासपेशियों को मजबूत करने के लिए प्रशिक्षण दे सके। प्रसव के दौरान मजबूत मासपेशियों का होना बहुत जरूरी है।

इन उपायों को आजमाने से आपको स्वस्थ गर्भावस्था तो मिलेगी ही साथ ही आपका प्रसव भी काफी आरामदेह तरीके से हो सकेगा। याद रखिए, शारीरिक रूप से सक्रिय रहने का कोई विकल्प नहीं है। इससे गर्भावस्था के दौरान आप स्वस्थ रहती हैं और आपका बच्चा भी स्वस्थ पैदा होता है।

Normal Delivery ke 10 Aasan Upay::

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पर्सनालिटी तभी आकर्षक लगती है। जब उनका शरीर गठीला और मसल्स मजबूत हो। जिन लोगों की मसल्स मजबूत होती हैं उनका शरीर अपने आप शेप में दिखाई देता है। इसके लिए सिर्फ घंटों जिम में गुजरना ही काफी नहीं है, बल्कि सही डाइट प्लान भी जरूरी होता है।


खानपान पर यदि पूरी तरह से ध्यान दिया जाए तो मसल्स मजबूत होती हैं और शरीर आंतरिक रूप से ताकतवर बन जाता है। आइए आज जानते हैं हम कुछ ऐसी ही 15 चीजों के बारे में जिनके नियमित सेवन से मसल्स


1. फल और सब्जियां
मसल्स को मजबूत बनाने के लिए फल और सब्जियों का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए। इनमें विटामिन, मिनरल्स और कई पोषक तत्व व प्रोटीन पाए जाते हैं, जो कि मसल्स को मजबूत बनाते हैं।

2. लो फैट डेयरी उत्पाद
कम फैट वाले डेयरी उत्पादों जैसे दूध, दही, छाछ आदि में प्रोटीन अधिक मात्रा में होता है। इसीलिए पुरुषों को इनका नियमित सेवन करना चाहिए। एक कप दूध से लगभग 8 मि.ग्रा. कार्निटिन मिलता है। दूध से बनी चीजों में कैल्शियम, विटामिन-ए जैसे आवश्यक पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं। इसके अलावा इनमें कार्बोहाइड्रेट और विटामिन डी भी अच्छी मात्रा में मौजूद होते हैं, जिससे मांसपेशियों को मजबूती मिलती है।

3. ड्राय फ्रूट्स
ड्राय फ्रूट्स और नट्स दोनों में ही भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। पुरुषों को ड्रायफ्रूट्स का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए। फिर चाहें तो इन्हें कच्चा खाएं या फिर भूनकर खाएं। इनमें फैट्स रेशे, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जिनसे मसल्स मजबूत होती हैं।

4. अंकुरित अनाज

अंकुरित अनाज पुरुषों की सेहत के लिए बहुत अच्छे होते हैं। यह पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। साथ ही, यह जिंक जैसे पोषक तत्वों का स्रोत हैं, जो पुरुषों में कमजोरी और नपुंसकता की समस्या कम करने में सहायक होते हैं व मसल्स को मजबूत बनाते हैं।

5. मूंगफली

मूंगफली में जिंक के साथ ही भरपूर मात्रा में वसीय अम्ल पाए जाते हैं। ये वसीय अम्ल पुरुषों के लिए फायदेमंद होते हैं। इसके सेवन से पुरुषों में कमजोरी की समस्या दूर हो जाती है।

6. लहसुन

लहसुन का सेवन भी पुरुषों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होता है। लहसुन में एंटी-बैक्टीरियल और एंटीवायरल तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। साथ ही, इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण भी मौजूद होते हैं। यह परिसंचरण तंत्र को भी स्वस्थ बनाता है।

7. ब्रॉकली
ब्रॉकली खाने के भी चमत्कारिक लाभ हैं। इसमें पाया जाने वाला आइसोथायोसाइनेट्स यकृत को उत्तेजित करता है। यह उन एन्जाइम्स के निर्माण में सहायता करता है, जो कैंसर उत्पन्न करने वाली कोशिकाओं के प्रभाव को कम करते हैं। इसमें विटामिन-सी भी मौजूद होता है। इसीलिए इसे पुरुषों की सेहत के लिए बेहतरीन औषधि माना गया है।

8. तुलसी टी
तुलसी टी का सेवन भी पुरुषों के लिए बहुत अच्छा होता है।तुलसी पत्ते में ओसियाम प्रचूर मात्रा में पाया जाता है। यह कैंसर होने से रोकता है।तुलसी टी रोजाना पीने से पेट, फेफड़ों व आंतों की बीमारियां दूर होती हैं।

9. आम और पपीता
आम और पपीता, दोनों में ही भरपूर मात्रा में विटामिन ए पाया जाता है। आम में अमीनों अम्ल, विटामिन ए, सी और ई, नियासिन, बिटाकेरोटिन, आयरन, कैल्शियम और पोटैशियम पाया जाता है। वहीं, पपीता में पर्याप्त मात्रा में विटामिन बी व सी के साथ ही एंटीआक्सीडेंट भी मौजूद होते हैं। इन दोनों फलों के छिलकों में बायोफ्लैवेनॉइड्स पाया जाता है। इसीलिए यह फल पुरुषों को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

10. शिमला मिर्च
शिमला मिर्च भी पुरुषों के लिए फायदेमंद होती है। कुछ शोधों के अनुसार लाल शिमला मिर्च में संतरे के रस के मुकाबले तीन गुना ज्यादा विटामिन सी पाया जाता है। वैज्ञानिकों की मानें तो फ्लैवोनॉइड्स के लिए लाल शिमला मिर्च प्रभावी विकल्प है। फ्लैवोनॉइड्स पुरुषों को सेहतमंद बनाता है।

11. टमाटर
टमाटर में लाइकोपीन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। लाइकोपीन पौधों में पाया जाने वाला एक प्राकृतिक रासायनिक पदार्थ है। यह रासायनिक पदार्थ अपने एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जाना जाता है। यह प्रॉस्ट्रेट, फेफड़े और पेट के कैंसर को खत्म करता है। साथ ही, चेहरे की लालिमा और चमक भी बढ़ाता है

12.अनार
पुरुषों को अनार का जूस अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। रोजाना एक गिलास अनार का जूस पीने से पुरुषों को प्रोस्टेट की समस्या नहीं होती है।

13. रागी
रागी कैल्शियम का सबसे बढिय़ा स्रोत है। यह पुरुषों को ऑस्टियोपोरेसिस से बचाता है। साथ ही, यह जिंक तथा रेशे का भी अच्छा स्रोत है। इसके नियमित सेवन से डिसलिपिडीमिया, डायबिटीज और मोटापे से बचा जा सकता है।

14. कद्दू
कद्दू भी पुरुषों के लिए लाभदायक होता है। इसमें रेशे, विटामिन, खनिज और कई स्वास्थ्यवर्धक एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इसके इन्ही गुणों के कारण इसके नियमित सेवन से ताउम्र स्किन जवां बनी रहती है।

15. सोया
सोया में मौजूद आइसोफ्लैवोन्स प्रॉस्ट्रेट की रक्षा करते हैं। यह प्रॉस्ट्रेट कैंसर के खतरे को कम करते हैं। रोजाना 25 ग्राम सोया प्रोटीन के सेवन से कोलेस्ट्रॉल स्तर को भी कम किया जा सकता है।बॉडी बनाने के घरेलू उपाय पर्सनालिटी तभी आकर्षक लगती है।

जब उनका शरीर गठीला और मसल्स मजबूत हो। जिन लोगों की मसल्स मजबूत होती हैं उनका शरीर अपने आप शेप में दिखाई देता है। इसके लिए सिर्फ घंटों जिम में गुजरना ही काफी नहीं है, बल्कि सही डाइट प्लान भी जरूरी होता है।

खानपान पर यदि पूरी तरह से ध्यान दिया जाए तो मसल्स मजबूत होती हैं और शरीर आंतरिक रूप से ताकतवर बन जाता है। आइए आज जानते हैं हम कुछ ऐसी ही 15 चीजों के बारे में जिनके नियमित सेवन से मसल्स मजबूत हो जाती हैं।

1. फल और सब्जियां
मसल्स को मजबूत बनाने के लिए फल और सब्जियों का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए। इनमें विटामिन, मिनरल्स और कई पोषक तत्व व प्रोटीन पाए जाते हैं, जो कि मसल्स को मजबूत बनाते हैं।

2. लो फैट डेयरी उत्पाद
कम फैट वाले डेयरी उत्पादों जैसे दूध, दही, छाछ आदि में प्रोटीन अधिक मात्रा में होता है। इसीलिए पुरुषों को इनका नियमित सेवन करना चाहिए। एक कप दूध से लगभग 8 मि.ग्रा. कार्निटिन मिलता है। दूध से बनी चीजों में कैल्शियम, विटामिन-ए जैसे आवश्यक पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं। इसके अलावा इनमें कार्बोहाइड्रेट और विटामिन डी भी अच्छी मात्रा में मौजूद होते हैं, जिससे मांसपेशियों को मजबूती मिलती है।

3. ड्राय फ्रूट्स
ड्राय फ्रूट्स और नट्स दोनों में ही भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। पुरुषों को ड्रायफ्रूट्स का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए। फिर चाहें तो इन्हें कच्चा खाएं या फिर भूनकर खाएं। इनमें फैट्स रेशे, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जिनसे मसल्स मजबूत होती हैं।

4. अंकुरित अनाज
अंकुरित अनाज पुरुषों की सेहत के लिए बहुत अच्छे होते हैं। यह पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। साथ ही, यह जिंक जैसे पोषक तत्वों का स्रोत हैं, जो पुरुषों में कमजोरी और नपुंसकता की समस्या कम करने में सहायक होते हैं व मसल्स को मजबूत बनाते हैं।

5. मूंगफली
मूंगफली में जिंक के साथ ही भरपूर मात्रा में वसीय अम्ल पाए जाते हैं। ये वसीय अम्ल पुरुषों के लिए फायदेमंद होते हैं। इसके सेवन से पुरुषों में कमजोरी की समस्या दूर हो जाती है।

6. लहसुन
लहसुन का सेवन भी पुरुषों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होता है। लहसुन में एंटी-बैक्टीरियल और एंटीवायरल तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। साथ ही, इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण भी मौजूद होते हैं। यह परिसंचरण तंत्र को भी स्वस्थ बनाता है।

7. ब्रॉकली
ब्रॉकली खाने के भी चमत्कारिक लाभ हैं। इसमें पाया जाने वाला आइसोथायोसाइनेट्स यकृत को उत्तेजित करता है। यह उन एन्जाइम्स के निर्माण में सहायता करता है, जो कैंसर उत्पन्न करने वाली कोशिकाओं के प्रभाव को कम करते हैं। इसमें विटामिन-सी भी मौजूद होता है। इसीलिए इसे पुरुषों की सेहत के लिए बेहतरीन औषधि माना गया है।

8. तुलसी टी
तुलसी टी का सेवन भी पुरुषों के लिए बहुत अच्छा होता है।तुलसी पत्ते में ओसियाम प्रचूर मात्रा में पाया जाता है। यह कैंसर होने से रोकता है।तुलसी टी रोजाना पीने से पेट, फेफड़ों व आंतों की बीमारियां दूर होती हैं।

9. आम और पपीता
आम और पपीता, दोनों में ही भरपूर मात्रा में विटामिन ए पाया जाता है। आम में अमीनों अम्ल, विटामिन ए, सी और ई, नियासिन, बिटाकेरोटिन, आयरन, कैल्शियम और पोटैशियम पाया जाता है। वहीं, पपीता में पर्याप्त मात्रा में विटामिन बी व सी के साथ ही एंटीआक्सीडेंट भी मौजूद होते हैं। इन दोनों फलों के छिलकों में बायोफ्लैवेनॉइड्स पाया जाता है। इसीलिए यह फल पुरुषों को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

10. शिमला मिर्च
शिमला मिर्च भी पुरुषों के लिए फायदेमंद होती है। कुछ शोधों के अनुसार लाल शिमला मिर्च में संतरे के रस के मुकाबले तीन गुना ज्यादा विटामिन सी पाया जाता है। वैज्ञानिकों की मानें तो फ्लैवोनॉइड्स के लिए लाल शिमला मिर्च प्रभावी विकल्प है। फ्लैवोनॉइड्स पुरुषों को सेहतमंद बनाता है।

11. टमाटर
टमाटर में लाइकोपीन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। लाइकोपीन पौधों में पाया जाने वाला एक प्राकृतिक रासायनिक पदार्थ है। यह रासायनिक पदार्थ अपने एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जाना जाता है। यह प्रॉस्ट्रेट, फेफड़े और पेट के कैंसर को खत्म करता है। साथ ही, चेहरे की लालिमा और चमक भी बढ़ाता है

12.अनार
पुरुषों को अनार का जूस अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। रोजाना एक गिलास अनार का जूस पीने से पुरुषों को प्रोस्टेट की समस्या नहीं होती है।

13. रागी
रागी कैल्शियम का सबसे बढिय़ा स्रोत है। यह पुरुषों को ऑस्टियोपोरेसिस से बचाता है। साथ ही, यह जिंक तथा रेशे का भी अच्छा स्रोत है। इसके नियमित सेवन से डिसलिपिडीमिया, डायबिटीज और मोटापे से बचा जा सकता है।

14. कद्दू
कद्दू भी पुरुषों के लिए लाभदायक होता है। इसमें रेशे, विटामिन, खनिज और कई स्वास्थ्यवर्धक एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इसके इन्ही गुणों के कारण इसके नियमित सेवन से ताउम्र स्किन जवां बनी रहती है।

15. सोया
सोया में मौजूद आइसोफ्लैवोन्स प्रॉस्ट्रेट की रक्षा करते हैं। यह प्रॉस्ट्रेट कैंसर के खतरे को कम करते हैं। रोजाना 25 ग्राम सोया प्रोटीन के सेवन से कोलेस्ट्रॉल स्तर को भी कम किया जा सकता है।

Monday, 21 November 2016

शक्ति कमजोरी से पीडित रोगियो को शुरू में 5-5 घंटे के अंतराल से विशेष रूप से ताजा फलो का आधार लेना चाहिए उसके बाद वह पुन: अपनी नियमित खुराक धीरे-धीरे प्रारंभ कर सकते है। रोगी को धूम्रपान , शराब चाय तथा कॉफी के सेवन से बचना चाहिए, और विशेष रूप से सफेद चीनी तथा मैदे या उनसे बने उत्पादो का परहेज करना चाहिए।

30 ग्राम किशमिश को गुनगुने पानी मे धोए, 200 मिली दूध मे उबाले तथा दिन मे तीन बार सेवन करे। ध्यान रखिए की प्रत्येक बार ताजा मिश्रण तैयार करे। धीरे धीरे 30 ग्राम किशमिश की मात्रा को 50 ग्राम तक करें।


15 ग्राम तुलसी के बीज और 30 ग्राम सफेद मुसली लेकर चूर्ण बनाएं, फिर उसमें 60 ग्राम मिश्री पीसकर मिला दें और शीशी में भरकर रख दें। 5 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें इससे यौन दुर्बलता दूर होती है।

शारीरिक कमजोरी दूर करने के उपाय:



केला : दिन में खाना-खाने के बाद 2 या 3 पके केले रोजाना नियमित रूप से खाने से शरीर में शक्ति, मांस और चर्बी बढ़ती है। इसका प्रयोग लगातार 2 महीने तक करने से शरीर सुंदर बन जाता है।

आंवला : लगभग 10 ग्राम की मात्रा में हरे आंवला को लगभग इतनी ही मात्रा में शहद में मिलाकर खाने से मनुष्य के वीर्य-बल में वृद्धि होती है। आंवलों के मौसम में इसका सेवन रोजाना सुबह के समय लगभग 1 से 2 महीने तक करना चाहिए।

बराबर मात्रा में आंवले का चूर्ण, गिलोय का रस, सफेद मूसली का चूर्ण, गोखरू का चूर्ण, तालमखाना का चूर्ण, अश्वगंध का चूर्ण, शतावरी का चूर्ण, कौंच के बीजों का चूर्ण और मिश्री का चूर्ण लेकर इनका मिश्रण बना

लें। अब इस मिश्रण को रोजाना सुबह और शाम को लगभग 10 से 15 ग्राम की मात्रा में फांककर ऊपर से हल्का गर्म दूध पीने से मनुष्य के संभोग करने की शक्ति का विकास होता है। इसको लगातार 3 या 4

महीने तक फायदा होने तक खाना चाहिए।

किशमिश : सुबह के समय लगभग 25 से 30 किशमिश लेकर इनको गर्म पानी से धोकर साफ कर लें और कच्चे दूध में डाल दें। आधा या एक घंटे बाद उस दूध को गर्म करें। इसके बाद किशमिश को एक-एक

करके खा लें और ऊपर से उसी दूध को पी लें। ऐसा करने से शरीर में खून बढ़ता है। इसके अलावा आवश्यकता से अधिक ठंड़ का अनुभव, पुरानी बीमारी, अधिक कमजोरी, जिगर की खराबी और बदहजमी दूर हो

जाती है।

अंगूर : लगभग 25 मिलीलीटर की मात्रा में अंगूर का रस भोजन करने के आधे घंटे बाद पीने से शरीर में खून बढ़ता है। इसके अलावा इसका रस पीने से पेट फूलना, अफारा, दिल का दौरा पड़ना, चक्कर आना,

सिरदर्द और भोजन न पचना आदि बीमारियां दूर हो जाती है। इसका सेवन लगभग 2 या 3 हफ्ते तक लगातार करना चाहिए। इसके अलावा इसका सेवन महिलाओं के लिए भी लाभकारी होता है। कमजोर बच्चों को

भोजन के बाद अंगूर का रस पिलाना काफी लाभकारी सिद्ध होता है। अंगूर का रस बच्चों के चेहरे को लाल कर देता है।

पालक : शरीर में कमजोरी आने पर या खून की कमी होने पर लगभग 225 मिलीलीटर की मात्रा में रोजाना पालक का रस पीना चाहिए। इससे चेहरा एक दम गुलाब की तरह लाल हो जाता है। इसके अलावा इसका

रस पीने से मानसिक तनाव और हाई ब्लडप्रेशर भी सामान्य रहता है।

टमाटर : टमाटर का रोजाना सेवन करने से खून शुद्ध रहता है, और खून में वृद्धि होती है। टमाटर खाने से आंखों के रोग, जिगर में किसी तरह की खराबी आने के कारण होने वाली सुस्ती, आंतों के कीड़ें और आमाशय

की कमजोरी दूर होती है। टमाटर पाचन क्रिया को बढ़ाता है। पथरी वाले व्यक्ति को टमाटर नहीं खाना चाहिए।

सौंफ : सौंफ और मिश्री को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को सुबह-शाम भोजन के बाद दो चम्मच लेने से दिमाग तेज होता है। इसका सेवन लगातार एक या दो महीने तक करना चाहिए।
मालकांगनी :मालकांगनी के बीज, बच, देवदारू और अतीस आदि का मिश्रण बना लें। रोज सुबह-शाम इस मिश्रण को 1 चम्मच घी के साथ पीने से दिमाग तेज और फुर्तीला बनता है।
मालकांगनी के तेल की 5-10 बूंदे मक्खन के साथ सेवन करने से भी शरीर को लाभ मिलता है।

धनिया :शक्ति को ऊर्जा भी कहते हैं। यह ऊर्जा मनुष्य को भोजन से मिलती है। परन्तु धनिया इस ऊर्जा को और बढ़ा देता है। इसके लिए आपको खाना खाने के बाद दस दाने धनिया के मुंह में डालने होंगे। इन दानों

को दाढ़ों से कुचलकर इसका रस कंठ (गले) के नीचे उतार लीजिए और दानों को थूक देते हैं। ठीक आधा घंटे बाद आप देखेंगे कि आपके शरीर में गर्मी बढ़ गई। यह गर्मी पसीना लाने वाली गर्मी नहीं होती बल्कि यह

पाचनक्रिया को सही करने वाली गर्मी होती है क्योंकि जब पाचन क्रिया में वृद्धि होगी तब भोजन समय से तथा ठीक प्रकार से पच जाएगा। इसके बाद रक्त में जो ऊर्जा पैदा होती है वह पूरे शरीर में फुर्तीलापन लाती

है।लगभग 3 ग्राम की मात्रा में साबुत सूखे धनिये को पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को ठंड़े पानी और मिश्री के साथ मिलाकर गर्मी के दिनों में पीने से पित्त के कारण होने वाले रोगों से छुटकारा मिल जाता है।

200 ग्राम लहसुन पीसकर उसमें 60 मिली शहद मिलाकर एक साफ-सुथरी शीशी में भरकर ढक्कन लगाएं और किसी भी अनाज में 31 दिन के लिए रख दें। 31 दिनों के बाद 10 ग्राम की मात्रा में 40 दिनों तक इसको लें। इससे यौन शक्ति बढ़ती है।

एक ग्राम जायफल का चूर्ण प्रातः ताजे जल के साथ सेवन करने से कुछ दिनों में ही यौन दुर्बलता दूर होती है।
दो ग्राम दालचीनी का चूर्ण सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से वीर्य बढ़ता है और यौन दुर्बलता दूर होती है।
शीतकाल में सुबह दो-तीन खजूर को घी में भूनकर नियमित खाएं, ऊपर से इलायची- शक्कर डालकर उबला हुआ दूध पीजिए। यह उत्तम यौन शक्तिवर्धक है

5 मिलीलीटर से 10 मिलीलीटर के आसपास पुराने सेमल की जड़ का रस निकालकर व इसका काढ़ा बना लें तथा इसके अंदर चीनी मिला लें। इस मिश्रण को 7 दिनों तक पीने से वीर्य की बहुत ही अधिक बढ़ोत्तरी होती है। 6 ग्राम विदारीकन्द के चूर्ण में चीनी व घी मिला लें। इस चूर्ण को खाने के बाद इसके ऊपर से दूध पीने से वृद्ध पुरुष की भी संभोग करने की क्षमता कुछ ही दिन में वापस लौट आती है।

तालमखाने तथा शुद्ध कौंच के बीज के चूर्ण को बराबर-बराबर मात्रा में लेकर इसके अंदर दुगुनी मिश्री मिलाकर इसका चूर्ण बनाकर रख लें। रोजाना के समय में 2 चम्मच चूर्ण (लगभग 10 ग्राम के आसपास) को ताजे दूध के साथ मिलाकर खाने से सेक्स क्रिया करने की शक्ति सें आई कमजोरी भी नष्ट हो जाती है।

तालमखाने के बीज, गोखरू, शुद्ध कौंच के बीज, शतावरी, कंघी का जड़ तथा नागबला- इन सबको बराबर-बराबर की मात्रा में ले लें। इनको लेकर कूट-पीसकर इनका चूर्ण बनाकर रख लें। रात के समय में इस चूर्ण की 6 ग्राम की मात्रा को दूध के साथ प्रयोग करें। इस चूर्ण का सेवन करने से पुरुष कमजोरी दूर हो जाती है तथा व्यक्ति संभोग करने में काफी निपुण हो जाता है।

6 ग्राम गोखरू का चूर्ण और काले तिल 10 ग्राम को बराबर मात्रा में लेकर इसे 250 मिलीलीटर बकरी के दूध में उबालकर तथा उसे ठंडा करके शहद को मिलाकर खाना चाहिए। इसका सेवन करने से हैंडप्रैक्टिस से क्रिया में आई कमजोरी भी समाप्त हो जाती है।

100ग्राम इमली के बीजों को लेकर उन बीजों को पानी में भिगोकर 4-5 दिनों के लिए रख दें तथा पाचवें दिन उन बीजों का छिलका उतारकर उनका वजन करके देखें। उनका वजन करने के बाद उनके वजन से दुगुना पुराने गुड़ (देशी ) को लेकर उन बीजों में मिलाकर रख दें। इसके बाद इन्हें बारीक पीसकर अच्छी तरह से घोट लें तत्पश्चात इस मिश्रण की चने के बराबर बारीक-बारीक गोलियां बना लें। 

सेक्स क्रिया शुरू करने  के 1 से 2 घंटे पहले दो गोलियों को खा लें। इसका सेवन करने से सेक्स शक्ति में अजीब की शक्ति आ जाती है। कई लोगो पे आजमाया गया नुस्खा है काफी लोगो की से छमता में वृधि हुई है और सार्थक परिणाम की प्राप्ति हुई है - ठण्ड के मौसम में कभी-कभी बीजो को फूलने में जादा समय लग सकता है

500 ग्राम विधारा और 500 ग्राम नागौरी असगंध- इन दोनों को ले लें। फिर इसे अच्छी तरह से कूट-पीसकर तथा इसे छानकर रख लें। सुबह के समय रोजाना इस चूर्ण को 2 चम्मच खा लें। उसके बाद ऊपर से मिश्री मिला हुआ गर्म-गर्म दूध को पी लें। इस चूर्ण का इस्तेमाल करने से बुजुर्ग व्यक्ति भी जवानों के समान संभोग करने में निपुण हो जाता है।

संतरा : 1 गिलास संतरे का रस रोजाना दो बार कुछ सप्ताह तक पीते रहने से शरीर में ताकत आ जाती है। जो बच्चे बोतल से दूध पीते हैं कमजोर होते है, उनके लिए संतरे का रस बहुत लाभदायक होता है।

सफेद पेठा : भोजन करने के बाद पेठे की मिठाई खाने से शरीर मजबूत और ताकतवर बनता है। पित्त विकार में 2-2 पेठे के टुकड़े रोजाना खाने से लाभ होता है।

पुनर्नवा : पुनर्नवा को दूध के साथ खाने से शरीर मजबूत और ताकतवर बनता है।

फालसा : पके फालसे का सेवन करने से शरीर मजबूत और ताकतवर बनता है। यह हृदय रोग और रक्तपित्त या खूनी पित्त में भी काफी हितकारी होता है।

पपीता : बच्चों को रोजाना पपीता खिलाने से उनकी लम्बाई बढ़ती है और शरीर मजबूत तथा सेहत सही बनी रहती है।

अर्जुन :
अर्जुन बलकारक है तथा अपने लवण-खनिजों के कारण हृदय की मांसपेशियों को सशक्त बनाता है। दूध तथा गुड़, चीनी आदि के साथ जो अर्जुन की छाल का पाउडर नियमित रूप से लेता है, उसे हृदय रोग, जीर्ण ज्वर, रक्त-पित्त कभी नहीं सताते और वह चिरजीवी होता है।

Tuesday, 8 November 2016

पके कम नींद निकालने की आदत आपको ब्लड प्रेशर का मरीज बना सकती हैं। हाई ब्लड प्रेशर हो या लो ब्लड प्रेशर दोनों ही स्थितियां आपके सामान्य जीवन को नुकसान पहुंचाने का काम करती हैं। जो लोग 5 घंटे या उससे कम सोते हैं 

उनमें हाई ब्लड प्रेशर की समस्या आमतौर पर पाई जाती है। इसका खुलासा एक रिसर्च में भी किया गया है। ये आदत न सिर्फ ब्लड प्रेशर बल्कि हाइपर टेंशन का भी कारण बनती है।

Home remedies for blood pressure and diabetes:

वैज्ञानिकों का मानना है कि ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे लोग अगर रोज़ 7 घंटे की नींद लेने लगे तो इस समस्या पर काबू पाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा आप इन तरीकों को अपनाकर बिना कोई दवा खाए अपने ब्लड प्रेशर की समस्या को काबू में कर सकते है

नॉनवेज से बनाएं दूरी: 
नमक आपके शरीर में ज्यादा पानी बनाए रखने में मददगार साबित होता है। शरीर में जब पानी की मात्रा ज्यादा होती है तो ये ब्लड प्रेशर बढ़ाने का काम करती है। जो लोग ब्लड प्रेशर के पहले से मरीज़ है अगर वो ज्यादा नमक का इस्तेमाल करते हैं तो उनमें कार्डियोव्स्क्युलर बीमारियों का खतरा पहले से ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे लोगों को नॉन वेज भी संभल कर खाना चाहिए क्योंकि उसमें सामान्य से ज्यादा नमक पाया जाता है।

वर्कआउट करना ज़रूरी: 
ब्लड प्रेशर की समस्या से दूर रहने के लिए आपको हर हफ्ते करीब 150 मिनट वर्कआउट करने में खर्च करने चाहिए। रेग्युलर एरोबिक आपके ब्लड प्रेशर को सामान्य बनाए रखने में मदद करता है और आपको दवाओं से भी दूर कर देता है।

रोजाना करें मेडिटेशन: 
रिसर्च में सामने आया है कि दिन में सिर्फ 10 मिनट मेडिटेशन आपको ब्लड प्रेशर की समस्या से दूर रखता है। स्ट्रेस में मानव शरीर में एड्रेलिन नाम का एक हारमोन निकलता है, जो कि हार्टबीट और ब्लड प्रेशर को बढ़ाने का कम करता है। इसलिए स्ट्रेस भी ब्लड प्रेशर को बढ़ाने का काम करता है ऐसे में स्ट्रेस से दूर रहकर ब्लड प्रेशर से भी छुटकारा मिल जाता है।

लंबाई के अनुसार वज़न करें मेंटेंन : 
ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने के लिए आपको अपने वज़न को भी कंट्रोल में रखना पड़ता है। जैसे-जैसे आपका वज़न बढ़ता है आपके दिल को ब्लड पंप करने में मुश्किल पेश आने लगती है। इसका सीधा नतीजा ब्लड प्रेशर के रूप में सामने आता है। आपकी लंबाई के मुताबिक आपको अपना वज़न मेंटेन करना चाहिये।

डाइट में सब्जियां और फल करें शामिल : 
रिसर्च में ये सामने आया है कि आपकी थाली में सब्जियां और फल जितने ज्यादा होते हैं ब्लड प्रेशर की समस्या आपसे उतनी ही दूर रहती है। हापरटेंशन के मरीजों के लिए भी फ्रूट्स का इस्तेमाल करना बेहद फायदेमंद साबित होता है। ये आपके ब्लड को सामान्य रखने में मदद करता है। ये शरीर में विटामिन और पोटेशियम जैसे तत्वों को कम नहीं होने देते।

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Sunday, 6 November 2016

नई एवं पुरानी प्राणघातक बीमारियाँ दूर करने के लिए यह एक अत्यंत सरल एवं बहुत बढ़िया प्रयोग है। इसको हम यहाँ पानी प्रयोग कहेंगे। पानी प्रयोग नामक एक लेख 'जापानीज सिकनेस एसोसिएशन' की ओर से प्रकाशित हुआ है।

उसमें बताया गया है कि यथायोग्य रीति से पानी प्रयोग किया जाये तो निम्नलिखित पुरानी तथा नई प्राणघातक बीमारियाँ दूर हो सकती हैं-



मधुप्रमेह (डायबिटीज), सिरदर्द, ब्लडप्रेशर, एनिमिया (रक्त की कमी), जोड़ों का दर्द, लकवा (पेरेलिसिस), मोटापन, हृदय की धड़कनें एवं बेहोशी, कफ, खाँसी, दमा (ब्रोन्काईटीस),

Home Remedies For Diabetics In Hindi:


टी.बी., मेनिनजाईटीस), लीवर के रोग, पेशाब की बीमारियाँ, एसीडीटी (अम्लपित्त), गेस्ट्राईटीस (गैस विषयक तकलीफें), पेचिश, कब्ज, हरस, आँखों की हर किस्म की तकलीफें, 

स्त्रियों का अनियमित मासिकस्राव, प्रदर (ल्यकोरिया), गर्भाशय का कैंसर, नाक, कान एवं गले से सम्बन्धित रोग आदि आदि।

पानी पीने की रीतिः प्रभात काल में जल्दी उठकर, बिना मुँह धोये हुए बिना ब्रश किये हुए करीब सवा लीटर (चार बड़े गिलास) पानी एक साथ पी लें। तदनन्तर 45 मिनट तक कुछ भी खायें-पियें नहीं। पानी पीने के बाद मुँह धो सकते हैं, ब्रश कर सकते हैं।

यह प्रयोग चालू करने के बाद सुबह में अल्पाहार के बाद, दोपहर को एवं रात्रि को भोजन के बाद दो घण्टे बीत जाने पर पानी पियें। रात्रि के समय सोने से पहले कुछ भी खाये नहीं।

बीमार एवं बहुत ही नाजुक प्रकृति के लोग एक साथ चार गिलास पानी नहीं पी सकें तो वे पहले एक या दो गिलास से प्रारंभ करें और बाद में धीरे-धीरे एक-एक गिलास बढ़ाकर चार गिलास पर आ जायें। फिर नियमित रूप से चार गिलास पीते रहें।

डायबिटीज एवं अन्य रोगों के लिए:

बीमार हो या तन्दुरुस्त, यह प्रयोग सबके लिए इस्तेमाल करने योग्य है। बीमार के लिए यह प्रयोग इसलिए उपयोगी है कि इससे उसे आरोग्यता मिलेगी और तन्दुरुस्त आदमी यह प्रयोग करेगा तो वह कभी बीमार नहीं पड़ेगा।

जो लोग वायु रोग एवं जोड़ों के दर्द से पीड़ित हों उन्हें यह प्रयोग एक सप्ताह तक दिन में तीन बार करना चाहिए। एक सप्ताह के बाद दिन में एक बार करना पर्याप्त है। 

यह पानी प्रयोग बिल्कुल सरल एवं सादा है। इसमें एक भी पैसे का खर्च नहीं है। हमारे देश के गरीब लोगों के लिए बिना खर्च एवं बिना दवाई के आरोग्यता प्राप्त करने की यह एक चमत्कारिक रीति है।

चार गिलास पानी पीने से स्वास्थ्य पर कोई भी कुप्रभाव नहीं पड़ता। हाँ, प्रारंभ के तीन-चार दिन तक पानी पीने के बाद दो-तीन बार पेशाब होगा लेकिन तीन-चार दिन के बाद पेशाब नियमित हो जायेगा।

प्रातःकाल में दातुन करने से पहले पानी पीने से कई रोग मिट जाते हैं

Monday, 17 October 2016

झाइयाँ अक्सर बढ़ती उम्र के साथ बढ़ती जाती हैं, जो देखने में अच्छी नहीं लगती हैं। तेज धूप के कारण और शारीरिक स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण भी चेहरे पर झाइयाँ पड़ जाती हैं। झाइयों की समस्या से घरेलू उपचार द्वारा आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है।

झाइयां दूर करने के उपाय:


झाइयों को समाप्त करने के कुछ घरेलू उपाय इस प्रकार हैं-
* झाइयाँ अकसर पेट की खराबी से होती हैं या फिर अधिक तनावग्रस्त रहने से. खुश रहें, चिंता न पालें, पानी खूब पिएँ, दिन में कम से कम एक बार नीबू निचोड़कर पिएँ।



* बरगद का दूध चेहरे पर प्रतिदिन मलें। बीस मिनट बाद ठंडे पानी से धो डालें। बरगद के दूध में बहुत शक्ति व शीतलता होती है। इससे एक सप्ताह में आपकी छाइयाँ समाप्त हो जाएंगी।

* सफेद जीरा, काला जीरा, सरसों और काला तिल बराबर मात्रा में लेकर गाय के दूध में पीसकर लेप करने या उबटन करने से झाइयाँ और चेहरे के दाग दूर हो जाते हैं।
* आलू को घिसकर चेहरे पर लगाएँ।
* कटे टमाटर को चेहरे पर रगड़ना फायदेमंद होता है।
* खीरे के रस में जैतुन के तेल की बूँद मिलाकर लगाएँ।
* केले के गुदे को चेहरे पर लगाने से झाइयाँ मिटती हैं।
* गाजर के रस में पिसी बादाम व कच्चे दूध को मिलाकर लगाएँ।
* रोजाना बादाम का तेल चेहरे पर लगाएँ।

* खरबूज के बीज व छिलकों को थोड़ा पानी मिलाकर बारीक पीस लें। अप इस लेप को चेहरे पर 15 मिनिट तक लगा रहने दें। फिर पानी से चेहरा धो लें। इस पैक को रोजाना चेहरे पर लगाने से आपके चेहरे की झाइयाँ दूर होंगी।

* आधी कटोरी उड़द की दाल के पावडर में दो चम्मच गुलाबजल, एक चम्मच ग्लिसरीन व दो चम्मच बादाम रोगन मिलाकर इस लेप को चेहरे पर कुछ देर लगाकर रखें फिर हल्के गुनगुने पानी से चेहरा धो लें।
* चेहरे की झाइयाँ दूर करने के लिए आप आधा नीबू व आधा चम्मच हल्दी और दो चम्मच बेसन लें। अब इन चीजों को आपस में अच्छी तरह मिलाकर पेस्ट-सा बना लें। अब इस मिश्रण का मास्क चेहरे पर तीन या चार बार लगाए। झाइयाँ समाप्त हो जाएँगी और आपका चेहरा भी निखर जाएगा।

* चेहरे पर ताजे नीबू को मलने से भी झाइयों में लाभ होता है।


* चेहरे पर झाइयाँ तेज धूप पड़ने के कारण भी हो जाती हैं। अतः तेज धूप से जहाँ तक हो सके चेहरे को प्रभावित न होने दें।
* सेब खाने और सेब का गूदा चेहरे पर मलने से भी झाइयाँ दूर होती हैं।
* रात को नींद न आने से भी चेहरे पर झाइयाँ पड़ जाती हैं, जिन्हें दूर करने के लिए रात को सोने से पहले चेहरे को अच्छी तरह धोएँ। तदुपरांत एक चम्मच मलाई में तीन या चार बादाम पीसकर दोनों का मिश्रण बना लें, फिर इस मिश्रण को चेहरे पर लगाकर हल्के हाथों से मसाज करें और सो जाएँ। प्रातः उठकर बेसन से चेहरे को धो लें। इस प्रयोग से आपको आश्चर्यजनक लाभ होगा।
* झाइयों को समाप्त करने के लिए आप भोजन में सलाद का नियमित प्रयोग करें।
* दिन में एक गिलास गाजर का रस बिना नमक-मिर्च मिलाए पिएँ, इससे चेहरा तो सुर्ख सफेद होगा ही, साथ ही झाइयाँ भी समाप्त हो जाएँगी।
* ताजा टमाटर काटकर चेहरे पर हल्के हाथों से मसाज करने से थोड़े दिनों के उपरांत चेहरे की झाइयाँ कम हो जाएँगी और रंगत भी निखर जाएगी।

कुछ आसान उपाय झाइयाँ मिटाएँ | चेहरे की झाइयाँ दूर करने के घरेलू उपचार | झाइयां दूर करने के उपाय | How to Get Rid of Freckles in Less Than a Week

Friday, 14 October 2016

वैसे तो यह सबको पता है कि नींबू और शहद के साथ गुनगुना गर्म पानी पीना स्वास्थ्यलाभ के दृष्टि से अच्छा होता है। मगर इसके बारे में सही जानकारी शायद ही किसी को है, इसलिए इस पेय को पीने से स्वास्थ्यलाभ संबंधित दस कारणों के बारे जानकारी दी जा रही है |

शहद और नींबू के साथ गुनगुना गर्म पानी पीने के दस स्वास्थ्यवर्द्धक कारण:



सुबह उठकर खाली पेट नींबू और शहद गुनगुने गर्म पानी में डालकर पीने से वज़न घटने के साथ-साथ दिन भर आप एनर्जी से भरपूर रहेंगे।


हजम शक्ति को बढ़ाता है: नींबू, शहद और गर्म पानी तीनों मिलकर हजम शक्ति को बढ़ाते हैं। नींबू लीवर को पित्त(बाइल) के उत्पादन में सहायता करता है और शरीर से विषाक्त पदार्थ को निकालने में भी मदद करता है। शहद में  एन्टीबैक्टिरीयल गुण होता है जिसके कारण वह शरीर को इनफेक्शन से बचाता है। यह आंत में श्लेष्मा(म्यूकस) के उत्पादन में सहायता करने के कारण शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में भी मदद करता है।

 पेट को साफ करके कोलोन के कार्य को उन्नत करता है: आयुर्वेद में कहा जाता है कि पेट में विषाक्त पदार्थों का उत्पादन होता है। जो बाद में बीमारियों के कारण बन जाते हैं। 

नींबू और शहद के साथ गर्म पानी
पीने से पेट से अमा या विषाक्त पदार्थ निकल जाते हैं और यह शरीर को पोषक तत्वों (nutrients) को सोखने में भी मदद करता है।

कब्ज़ से राहत दिलाता है:
यह मिश्रण कब्ज़ से जल्दी राहत दिलाने में मदद करता है।

नींबू और शहद के 10 चमत्कारिक टोटके आपको हैरान कर देगें:

लसीका प्रणाली (lymphatic system) को साफ़ करने में मदद करता है: चिकित्सा शास्त्र के नियम के अनुसार सूखा लसीका प्रणाली विभिन्न प्रकार के बीमारियों का कारण बन जाता है। लसीका प्रणाली में पानी के कमी के कारण आपको बिना वजह के थकान महसूस होगा, तनावग्रस्त रहेंगे, कब्ज़ की समस्या उत्पन्न होगी, नींदमें परेशानी होगी, उच्च या निम्न रक्त चाप की समस्या होगी आदि। इस मिश्रण को सुबह पीने से लसीका प्रणाली में जल की कमी नहीं होती है और प्रतिरक्षा क्षमता (immunity) का भी विकास होगा।

तुरन्त ऊर्जा मिलती है और मनोस्थिति में भी सुधार आता है: अगर आप थका हुआ महसूस कर रहे हैं तो इस मिश्रण को पीने से आप में तुरन्त ऊर्जा का संचार होने लगेगा और आप ताजा और ऊर्जायुक्त महसूस करेंगे। पानी मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को ठीक करने में मदद करता है। पेट में जो नेगटिव चार्ज्ड एन्जाइम्स होते हैं नींबू उन्हें सक्रिय करके पॉज़िटिव्ली चार्ज्ड एन्जाइम्स से लड़कर उन्हें खत्म करने में मदद करता हैं और खाना को हजम करवाने में मदद करता है। वैसे नींबू का महक ताजगी भी प्रदान करता है। 

Lukewarm water with honey and lemon drink ten healthy cause:

यह मूत्र पथ को साफ़ करने में मदद करता है: वैसे तो शहद में  एन्टीबैक्टिरीयल गुण होता है जिसके कारण वह कई प्रकार के इन्फेक्शन से लड़ने में शरीर को मदद करता है। जब शहद को नींबू और पानी से साथ मिलाया जाता है तब यह मूत्र पथ को साफ़ रखने में मदद करता है। जिन महिलाओं को मूत्र पथ के संक्रमण(urinary tract infection) की बीमारी होती है उनके लिए यह मिश्रण भगवान के प्रसाद स्वरूप होता है। पढ़े-  
शरीर को नैचरल तरीके से डिटॉक्स करने वाले 7 खाद्द पदार्थ मौखिक स्वास्थ्य को उन्नत करता है: नींबू का क्षारिय गुण (acidic nature) जब शहद और पानी के साथ मिलता है तब मुँह से बदबू निकलने के बीमारी से राहत दिलाने में मदद करता है।

सुबह-सुबह इस मिश्रण को पीने से मुँह के जीवाणुओं (bacteria) को नष्ट करने में मदद करने के साथ-साथ जीभ के ऊपर जो सफ़ेद रंग का परत पड़ता है उस परत को भी साफ़ करने में मदद करता है।

इससे मुँह से बदबू नहीं निकलता है।

वज़न को घटाने में मदद करता है: इस मिश्रण में पेक्टिन नाम का फाइबर होता है जिससे पेट देर तक भरा हुआ महसूस होता है। इस तरह यह वज़न घटाने की प्रक्रिया में मदद करता है।

साफ़ और स्वच्छ त्वचा प्रदान करता है: यह मिश्रण त्वचा के लिए बहुत लाभदायक होता है। यह रक्त को शुद्ध करने में मदद करता है और नई रक्त कोशिकाओं को  बनाने में मदद करता है। साथ ही कोलेज़न के उत्पादन में भी सहायक होता है। इन सब गुणों के कारण इस मिश्रण को पीने से त्वचा में अलग ही निखार आ जाता है।

इस मिश्रण को पीने का नियम और बनाने की विधि:
इस मिश्रण को साधारणतः आप ब्रश करने के बाद ही पीना पसंद करेंगे मगर बिना ब्रश किए इसको पीने की सलाह दी जाती है।

विधि:
एक गिलास गुनगुना गर्म पानी लें, उसमें आधा नींबू का रस और एक छोटा चम्मच शहद डालकर अच्छी तरह से मिला लें। इस मिश्रण को बनाने के बाद तुरन्त पी लें। इसको पीने के एक घंटा के बाद ही चाय या कॉफी पीयें।

Wednesday, 12 October 2016

शंखपुष्पी से hyper Thyroid का इलाज:

गुण :--शंखपुष्पी दस्तावर , मेघा के लिए हितकारी , वीर्य वर्धक , मानसिक दौर्बल्य को नष्ट करने वाली , रसायन ,कसैली , गर्म , तथा स्मरण शक्ति , कान्ति बल और अग्नि को बढाने वाली एवम दोष , अपस्मार , भूत , दरिद्रता , कुष्ट , कृमि तथा विष को नष्ट करने वाली होती है l यह स्वर को उत्तम करने वाली , मंगलकारी ,

अवस्था स्थापक तथा मानसिक रोगों को नष्ट करने वाली होती है l

परिचय : ----मनुष्य के मस्तिष्क पर प्रमुख क्रिया करने वाली यह वनस्पति दिमागी ताकत और याददाश्त को बढ़ाने के लिए प्रसिद्ध है l

 

शंखपुष्पी का उपयोग | शंखपुष्पी के चमत्कारिक गुण और लाभ | शंखपुष्पी के अदभुत गुण व घरेलु उपाए (Shankhpushpi):

फूलों के भेद से यह तीन प्रकार की होती है (१) सफ़ेद फूल वाली (२) लाल फूल वाली और (३) नीले फूल वाली l तीनों के गुण एक सामान है l यह बेलों के रूप में जमीं पर फैली हुई होती है और एक हाथ से ऊँची नहीं होती l यह सारे भारत में पैदा होती है l

Using Shankpushpi:

(१)-दिमागी ताकत :--प्राय: छात्र -छात्राओं के पत्रों में दिमागी ताकत और स्मरणशक्ति बढ़ाने के लिए गुणकारी ओषधि बताने का अनुरोध पढने को मिलता रहता है l छात्र- छात्रओं के अलावा ज्यदा दिमागी काम करने वाले सभी लोगों के लिए शंखपुष्पी का सेवन अत्यन्त गुणकारी सिद्ध हुआ है l

इसका महीन पिसा हुआ चूर्ण , एक-एक चम्मच सुबह- शाम , मीठे दूध के साथ या मिश्री की चाशनी के साथ सेवन करना चाहिए l

(२) शुक्रमेह :----शंखपुष्पी का महीन चूर्ण एक चम्मच और पीसी हुई काली मिर्च आधी चम्मच दोनों को मिला कर पानी के साथ फाकने से शुक्रमेह रोग ठीक होता है l

(३) ज्वर में प्रलाप :---तेज बुखार के कारण कुछ रोगी मानसिक नियंत्रण खो देते है और अनाप सनाप बकने लगते है l एसी स्थिति में शंखपुष्पी और मिश्री को बराबर वजन में मिलाकर एक-एक चम्मच दिन में तीन या चार बार पानी के साथ देने से लाभ होता है और नींद भी अच्छी आती है l

(४) उच्च रक्तचाप :--उच्च रक्तचाप के रोगी को शंखपुष्पी का काढ़ा बना कर सुबह और शाम पीना चाहिए l दो कप पानी में दो चम्मच चूर्ण डालकर उबालें l जब आधा कप रह जाए उतारकर ठंडा करके छान लें l यही काढ़ा है l दो या तीन दिन तक पियें उसके बाद एक-एक चम्मच पानी के साथ लेना शुरू कर दें रक्तचाप सामान्य होने तक लेतें रहें l

(४) बिस्तर में पेशाब :----कुछ बच्चे बड़े हो जाने पर भी सोते हुए बिस्तर में पेशाब करने की आदत नहीं छोड़ते l एसे बच्चों को आधा चम्मच चूर्ण शहद में मिलाकर सुबह शाम चटा कर ऊपर से ठंडा दूध या पानी पिलाना चाहिए l यह प्रयोग लगातार एक महीनें तक करें l
जीवनशैली है कमर दर्द की बड़ी वजह।व्‍यायाम से पाया जा सकता है इस पर काबू।योग को अपने जीवन का हिस्‍सा बनायें।अपने वजन को काबू में रखकर पायें राहत कमर दर्द की यह समस्या आजकल आम हो गई है। सिर्फ बड़ी उम्र के लोग ही नहीं बल्कि युवा भी कमर दर्द की शिकायत करते रहते हैं। कमर दर्द की मुख्य वजह बेतरतीब जीवनशैली और शारीरिक श्रम न करना है।


7 Natural Treatments for Back Pain: 

 

अधिकतर लोगों को कमर के मध्य या निचले भाग में दर्द महसूस होता है। यह दर्द कमर के दोनों और तथा कूल्हों तक भी फ़ैल सकता है। बढ़ती उम्र के साथ कमर दर्द की समस्या बढ़ती जाती है। नतीजा काम करने में परेशानी । कुछ आदतों को बदलकर इससे काफी हद तक बचा जा सकता है। आज हम आप को बताते हैं कि किन घरेलू नुस्खों को अपनाकर आप कमर दर्द से निजात पा सकते हैं।

क्‍यों होता है कमर दर्द मांसपेशियों पर अत्यधिक तनाव।अधिक वजन।गलत तरीके से बैठना।हमेशा ऊंची एड़ी के जूते या सेंडिल पहनना।गलत तरीके से अधिक वजन उठाना।शरीर में लम्बे समय से बीमारियों का होना।अधिक नर्म गद्दों पर सोना।

कमर दर्द से बचने के घरेलू उपाय:

1. रोज सुबह सरसों या नारियल के तेल में लहसुन की तीन-चार कलियॉ डालकर (जब तक लहसुन की कलियां काली न हो जायें) गर्म कर लें। ठंडा होने पर इस तेल से कमर की मालिश करें।
2. नमक मिले गरम पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। इसके बाद पेट के बल लेट जाएं। दर्द के स्थान पर तौलिये से भाप लें। कमर दर्द से राहत पहुंचाने का यह एक अचूक उपाय है।
3. कढ़ाई में दो-तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से सेक लें। इस नमक को थोड़े मोटे सूती कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। कमर पर इस पोटली से सेक करने से भी दर्द से आराम मिलता है।
4. अजवाइन को तवे के पर थोड़ी धीमी आंच पर सेंक लें। ठंडा होने पर धीरे-धीरे चबाते हुए निगल जाएं। इसके नियमित सेवन से कमर दर्द में लाभ मिलता है।
5. अधिक देर तक एक ही पोजीशन में बैठकर काम न करें। हर चालीस मिनट में अपनी कुर्सी से उठकर थोड़ी देर टहल लें।
6. नर्म गद्देदार सीटों से परहेज करना चाहिए। कमर दर्द के रोगियों को थोड़ा सख्ते बिस्तर बिछाकर सोना चाहिए।
7. योग भी कमर दर्द में लाभ पहुंचाता है। भुन्ज्गासन, शलभासन, हलासन, उत्तानपादासन, श्वसन आदि कुछ ऐसे योगासन हैं जो की कमर दर्द में काफी लाभ पहुंचाते हैं। कमर दर्द के योगासनों को योगगुरु की देख रेख में ही करने चाहिए।

8. कैल्शियम की कम मात्रा से भी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, इसलिए कैल्शियमयुक्त चीजों का सेवन करें।
9. कमर दर्द के लिए व्यायाम भी करना चाहिए। सैर करना, तैरना या साइकिल चलाना सुरक्षित व्यायाम हैं। तैराकी जहां वजन तो कम करती है, वहीं यह कमर के लिए भी लाभकारी है। साइकिल चलाते समय कमर सीधी रखनी चाहिए। व्यायाम करने से मांसपेशियों को ताकत मिलेगी तथा वजन भी नहीं बढ़ेगा।

10. कमर दर्द में भारी वजन उठाते समय या जमीन से किसी भी चीज को उठाते समय कमर के बल ना झुकें बल्कि पहले घुटने मोड़कर नीचे झुकें और जब हाथ नीचे वस्तु तक पहुंच जाए तो उसे उठाकर घुटने को सीधा करते हुए खड़े हो जाएं।

11. कार चलाते वक्त सीट सख्त होनी चाहिए, बैठने का पोश्चर भी सही रखें और कार ड्राइव करते समय सीट बेल्ट टाइट कर लें।

12. ऑफिस में काम करते समय कभी भी पीठ के सहारे न बैठें। अपनी पीठ को कुर्सी पर इस तरह टिकाएं कि यह हमेशा सीधी रहे। गर्दन को सीधा रखने के लिए कुर्सी में पीछे की ओर मोटा तौलिया मोड़ कर लगाया जा सकता है।

इन सब उपायों को अपना कर आप भी कमर दर्द से कुछ निजात पा सकते है।

कमर दर्द भगाने के घरेलू उपाय in hindi | domestic remedy back pain | 7 Natural Ways to Ease Back Pain

Tuesday, 11 October 2016

त्वचा पर खुजली चलने, दाद हो जाने, फोड़े-फुंसी हो जाने पर खुजा-खुजाकर हाल, बेहाल हो जाता है और लोगों के सामने शर्म भी आती है। यदि आप कोई क्रीम या दवा लगाना न चाहें या लगाने पर भी आराम न हो तो घर पर ही यह चर्म रोगनाशक तेल बनाकर लगाएँ, इससे यह व्याधियाँ दूर हो जाती हैं।


दाद और खुजली से छुटकारा पाने के घरेलू उपाय:

तेल बनाने की विधि :-
* नीम की छाल, चिरायता, हल्दी, लाल चन्दन, हरड़, बहेड़ा, आँवला और अड़ूसे के पत्ते, सब समान मात्रा में। तिल्ली का तेल आवश्यक मात्रा में। सब आठों द्रव्यों को 5-6 घंटे तक पानी में भिगोकर निकाल लें और पीसकर  


कल्क(लुगदी ) बना लें।
इसके बाद (लुगदी )पीठी से चार गुनी मात्रा में आप तिल का तेल और तेल से चार गुनी मात्रा में पानी लेकर मिलाकर एक बड़े बरतन में डाल दें। इसे मंदी आंच पर इतनी देर तक उबालें कि पानी जल जाए सिर्फ तेल बचे। इस तेल को शीशी में भरकर रख लें।

* जहाँ भी खुजली चलती हो, दाद हो वहाँ या पूरे शरीर पर इस तेल की मलिश करें। यह तेल चमत्कारी प्रभाव करता है। लाभ होने तक यह मालिश जारी रखें, मालिश स्नान से पहले या सोते समय करें और चमत्कार देखें।

* खून की खराबी के कारण खुजली हो जाती है| यह रोग अधिक खतरनाक नहीं है| लेकिन यदि असावधानी बरती जाती है तो यह रोग जटिल बन जाता है| इसलिए रोगी को खाने-पीने के मामले में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए| 

जहां तक हो सके, बाजार के खुले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए| यदि रोग बड़े पैमाने पर हो तो नमक और नमकीन चीजों को खाना बंद कर दें| इसके साथ-साथ इमली, अचार, नीबू, टमाटर, तेल, लाल मिर्च, चाय आदि का सेवन त्याग देना चाहिए|

*यह एक संक्रामक रोग है| यदि घर में किसी एक व्यक्ति को खुजली हो जाती है तो यह धीरे-धीरे परिवार के सभी सदस्यों को घेर लेती है| यह गरम चीजें खाने, छूने, श्वास के साथ जीवाणु फैलने, गलत इंजेक्शन लगवाने, शराब पीने, गुटका या पान-तम्बाकू खाने आदि के कारण हो जाती है|

* त्वचा पर लाल रंग के चित्तीदार दाने निकल आते हैं| इनमें बहुत अधिक खुजली होती है| रोगी उसे खुजाते-
खुजाते दु:खी हो जाता है| खुजली में जलन होती है तथा धीरे-धीरे लाल ददोरे पड़ जाते हैं| कई बार खुजाते हुए ददोरे छिल जाते हैं और उनमें से खून निकल आता है| पक जाने पर पतला पानी-सा पीव रिसने लगता है|

Home Remedies for Ringworm in Hindi:

* रात को तांबे के बरतन में थोड़ा-सा दही रख दें| सुबह दही का रंग कुछ नीला पड़ जाएगा| इस दही को उसी बरतन में कुछ देर तक फेंटे| फिर इस मलहम को खुजली वाले स्थान पर लगाएं|

* सुबह कुछ दिनों तक एक चम्मच नीम की पत्तियों का रस पिएं| नीम की पत्तियों को पीसकर दही में मिलाकर खुजली वाले स्थान पर प्रतिदिन लगाएं|

* 250 ग्राम तिली के तेल में 50 ग्राम दूब का रस मिलाकर कुछ देर तक आग पर पकाएं| ठंडा होने पर छानकर शीशी में भर लें| इस तेल को खुजली वाले चर्म पर लगाने से 5-6 दिनों में खुजली जाती रहती है|
* रोज सुबह सात-आठ दिनों तक चार-पांच नीम की कोंपलें चबाकर खा जाएं| ऊपर से ताजा पानी पी लें|
* दो चम्मच तुलसी के पत्तों का रस तथा दो चम्मच नीबू का रस आपस में मिला लें| फिर इसे रुई के फाहे से लगाएं|
* गरम पानी में थोड़ी-सी अजवायन चटनी की तरह पीस लें| फिर इसे खुजली पर लगाएं|
* जीरे को कपड़छन चूर्ण पानी में गाढ़ा-गाढ़ा घोलकर खुजली वाली जगह पर लगाएं|
* 250 ग्राम तिली या सरसों के तेल में चार-पांच चम्मच दूब का रस तथा 100 ग्राम पिसी हुई हल्दी मिला लें|
अब इसको लोहे को कड़ाही में पकाएं| थोड़ी देर बाद इस तेल को छानकर बोतल में भर लें| नित्य दिन में तीन
बार रुई के फाहे से इस तेल को लगाएं |
* आधे नीबू पर थोड़ी-सी पिसी हुई फिटकिरी बुरककर खुजली वाले स्थान पर अच्छी तरह लगाएं| नारियल के
एक गुने तेल में दो गुना टमाटर का रस मिलाकर लगाएं |
* 100 ग्राम तिली के तेल में 100 ग्राम बथुए का रस मिलाकर आग पर पका लें| फिर छानकर शीशी में भर लें|
इस तेल को नित्य लगाएं |
* गेहूं के आटे में तिली का तेल मिलाकर खुजली वाले स्थान पर लगाएं|
* खुजली वाले स्थान पर शहद लगाने से भी काफी लाभ होता है|
* सिरस का तेल खुजली में कम से कम दिन में चार बार लगाएं|
* यदि शरीर में सूखी खुजली हो तो नीबू के रस में केले के पत्तों की राख मिलाकर लगाएं|
* दो पके केलों को किसी बरतन में मथ लें| फिर उसमें एक नीबू का रस निचोड़कर अच्छी तरह मिला लें| इसे मलहम की तरह लगाएं|
* थोड़े-से पतले दही में मूंग की दाल (छिलकों सहित) पीस लें| फिर उसे खुजली वाले स्थान पर लगाएं|
* राई को गोमूत्र में पीस लें| फिर उसमें चिकनी मिट्टी मिलाएं| अब इसे खुजली वाले स्थान पर लेप करें|
* नीबू के रस में एक चुटकी नौसादर मिलाकर खुजली पर लगाएं|
* नारियल के तेल में नीबू का रस मिलाकर लगाने से खुजली नहीं होती|
* अरहर की दाल (कच्ची) पीसकर दही में मिला लें| फिर उसे खुजली वाले स्थान पर लगाएं|
* नीबू का रस तथा चमेली का तेल बराबर की मात्रा में मिलाकर खुजली पर लगाएं| सात-आठ दिनों में खुजली चली जाएगी |

क्या खाएं क्या नहीं:-
* खुजली हो जाने पर नमक बंद कर देना चाहिए|इसके साथ-साथ खटाई, तेल, मिर्च-मसाले, समोसे, कचौड़ी,
परांठे, अरहर की दाल, घुइयां, चावल, चाय, कॉफी, शराब, अंडा, मीट आदि त्याग देना चाहिए| इन सबकी जगह दूध, दही, घी, मक्खन, मट्ठा, हरी सब्जियां, खीरा, पपीता, अमरूद, ककड़ी, खरबूजा, तरबूज, सेब, अनार, चीकू आदि का प्रयोग करना चाहिए |

* यदि नमक खाने की इच्छा हो तो सब्जी में सेंधा नमक बहुत कम मात्रा में डालकर सेवन करें| आंवले का मुरब्बा खुजली में बहुत लाभकारी है| अत: गरमियों के दिनों में इसका भी सेवन करें |
दाद-खुजली के घरेलू उपचार | Home Remedies for Ringworm in Hindi | दाद और खुजली से छुटकारा पाने के घरेलू उपाय

Monday, 10 October 2016

How to get beautiful skin in a week:

कम उम्र से ही अच्छी स्किन और ब्यूटी आदतें डालना आगे चलकर आपकी त्वचा पर दिखती हैं. ब्यूटी और स्किनकेयर साथ-साथ चलते हैं, खासकर उन लोगों के लिए जो पूरे आत्मविश्वास के साथ खूबसूरत दिखना चाहती हैं बिना अपनी उम्र की चिंता किए. खूबसूरत स्किन वापस पाने में ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती, बस कुछ अच्छे प्रोडक्ट्स और अच्छी आदतें. तो अब जो गर्मियां शुरू होने वाली हैं, तो यही सही समय है अपनी स्किन पर ध्यान देने का. थोड़ी सी मेहनत जो लंबे समय तक अपना असर दिखाएगी!


30 के बाद भी जवां और खूबसूरत दिखने के लिए फॉलो करें ये 10 सिंपल टिप्स:

Top 10 Skin Care Tips To Get Your Best Skin Ever:

1. ध्यान से धोएं चेहरा
हर सुबह अपना चेहरा क्लेंज़ करें और रात में सोने से पहले सारा मेकप हटाकर एक बार फिर चेहरे को क्लेंज़ करना ना भूलें. इस तरह स्किन को अपने रिन्यूअल और प्रोटेक्टिव फंक्शन्स में आसानी होती है. हमेशा अपनी डर्मेटोलॉजिस्ट की सलाह से ही प्रोडक्ट्स का चुनाव करें, क्योंकी बाज़ार में कई तरह के प्रोडक्ट्स मौजूद हैं और सही चीज़ चुनना कभी-कभी काफी मुश्किल है.

2. एक्सफॉलिएट
दिन की बजाए अपनी स्किन को रात में एक्सफॉलिएट करें. रात के समय स्किन ज़्यादा अच्छे से और जल्दी काम करती है इसलिए सोने से पहले डेड स्किन हटाना काफी फायदेमंद है. अगर आपकी स्किन ऑयली या ऐक्ने-प्रोन है तो हफ्ते में दो बार स्क्रब करना काफी है.

3. स्किन में डालें जान
रोज़ाना नहाने के बाद हल्की गीली त्वचा पर ही की अच्छा मॉइश्चराइंज़िंग बॉडी लोशन या ऐप्रिकॉट आयल लगाएं.

4. तनाव से रहें दूर
कहना जितना आसान है करना उतना आसान नहीं है. बहुत ज़्यादा तनाव लेने से शरीर में ऐसे हॉर्मोन्स पैदा होने लगते हैं जिससे पिंपल्स या psoriasis जैसी स्किन प्रॉब्लम हो सकती है.

5. रूखी त्वचा को दूर भगाएं
ध्यान रखें कि त्वचा में कभी नमी की कमी ना हो. कामकाजी औरतों के लिए इसके लिए है एक बेहद अच्छी टिप – एसेंशियल बॉडी ऑयल्स या बादाम तेल / विटामिन E ऑयल / तिल के तेल की 4-5 बूंदे 2 मग पानी में डालकर शरीर पर छिड़क लें. ऐसा करने से शरीर पर एक मॉइश्चराइज़िंग परत बन जाएगी.

6. बचाव है ज़रूरी
अपनी त्वचा को दिन के समय बचाने के लिए किसी ऐंटिऑक्सिडेंट सीरम या विटामिन C सीरम को साथ में लगाएं. पर ध्यान रहे कि आप पहले सनस्क्रीन लगाएं.

7. सनस्क्रीन
ब्रॉड स्पेक्ट्रम UVA/UVB सन प्रोटेक्शन वाली सनस्क्रीन हर रोज़ लगाएं, यहां तक की बरसात के दिनों और सर्दियों में भी. UVA किरणें धीरे-धीरे असर करती हैं, जो पूरे साल एक समान रहती हैं.

8. ढेर सारा पानी पिएं
अंदरूनी तौर परनमी बनाए रखने के लिए ढेर सारा पानी पिएं. इस और ज़्यादा असरदार बनाने के लिए नींबू का रस डाल सकती हैं. अच्छा हेल्दी और फाइबर-युक्त खाना खाएं और हर रोज़ कम से कम 15-20 मिनट तक एक्सरसाइज़ करें.

9. नट्स हैं ज़रूरी
New York City की जानी-मानी dermatologist, Doris Day, अपने नाश्ते में शामिल करती हैं बादाम. इनमें फैटी ऐसिड्स होते हैं, जो झुर्रियों, बारीक लकीरों और धब्बों को कम करते हैं.

10. योगा जैसा कुछ भी नहीं
ज़्यादातर dermatologists अच्छी स्किन के लिए पीछे मुड़ना पसंद करेंगे – अरे सच में. शरीर में ऑक्सीजन की बढ़त आपके चेहरे पर लाता है ग्लो जो आता है योगा से. योगा करने की एक और वजह है कि ये तनाव कम करता है और स्किन पर उम्र का असर नहीं दिखने देता है.

इन टिप्स के साथ स्किन पर नहीं दिखेगा उम्र का असर | Top 10 Skin Care Tips To Get Your Best Skin Ever

मुख्य उपायों में से एक उपाय हैं वजन बढ़ाना. जब आपका वजन बढ़ता हैं तो धीरे धीरे आपके स्तनों का आकर भी बढ़ता हैं . वजन बढ़ने के लिए आप मूंगफली, चीज़, मक्खन, दही, नाशपाती और दुसरे स्वास्थ्यकर भोज्य पदार्थ खा सकते हैं.




अपने अग्र भाग को ज़मीन से सटाकर और हाथों को ज़मीन पर समतल रखकर पैरो को फर्श पर सीधा रखे और हथेली की सहायता से स्वयं को ऊपर उठाइए और धीरे धीरे निचे लाइए. यह प्रकिया कम से कम १३ से १५ बार दोहराए और आप अपने हाथों और छाती को मज़बूत और स्वस्थ महसूस करेंगे. कुँए से पानी खींचना भी छाती की मांसपेशियों के खिंचाव में मदद कर सकता है, जिससे आपके स्तन तेज़ी से बढ़ेंगे.


चौड़े और मजबूत सीने के लिए कारगर हैं ये उपाय:

कुर्सी के बीचो बिच बैठ जाइये और अपनों भुजाओ से समान वजन उठाइए. अपने हाथो वजन सहित सीधा कंधे के स्तर तक उठाइए और धीरे से निचे लाइए, ध्यान रखिये के आपके हाथ आपस में पास होने चाहिए.और आपके निचले शरीर के तरफ हाथो का मुख होना चाहिए. यह व्यायाम एक दिन में १२ बार और ३ सेट में करे. आप रात में ब्रा का उपयोग टाल सकती है.

अपने स्तनों की प्रतिदिन या हर रात ओलिव आयल से मालिश कीजिये

फल और सब्जियां – इनमें अस्ट्रोजन अधिक पाया जाता है. खजूर, चेरी, सेब और आलूबुखारा प्रतिदिन खाने के साथ खाना चाहिए.
मेथी- यह स्तन वृद्धि के लिए सिद्ध तथा उत्तम जड़ी है. इसलिए ऐसा भोजन करने की कोशिश कीजिये जिसमे मेथी का घटक हो. मेथी की पत्तियां दूध में भी वृद्धि करती हैं.

सोयाबीन- सोया उत्पाद जैसे सोया दूध, सोया मक्खन, सोया कॉफ़ी, सोया ब्रेड आदि में अस्ट्रोजन का स्तर उच्च होता है. स्तन वृद्धि में ये सोया उत्पाद अच्छा परिणाम देंगे.

जवस बीज- ये स्तन वृद्धि में बहुत प्रभावकारी पाए गए हैं. आप बहुत सारे दुसरे बीज भी स्तन वृद्धि में उपयोग कर सकते हैं जैसे पपीते के बीज, सौंफ के बीज, सूरजमुखी के बीज इत्यादि.

मटर और फलियाँ- आप मटर और फलियों से प्राकृतिक अस्ट्रोजन प्राप्त कर सकते हैं. राजमा, लाल राजमा, लिमा बीन्स, छोले और अम्जोद, प्रोटीन भोज्य पदार्थों के साथ खाया जाना चाहिए जो स्तन वृद्धि में मददगार होता है.
जैतून- जैतून और जैतून का तेल स्तन वृद्धि का सर्वोत्तम उपचार हैं. वर्जिन जैतून का तेल और कला जैतून स्तन वृद्धि के लिए सर्वोत्तम हैं. आप स्तन वृद्धि के लिए दूसरे तेल भी उपयोग कर सकते हैं जैसे कच्चे अखरोट का तेल, अलसी का तेल, अवोकेडो तेल और तिल का तेल.

हमेशा धीरज रखिये, स्तनों का आकार धीरे-धीरे बढ़ेगा और यह आपको जल्दी ही पता चल जाएगा. ख़ास तौर पर तब जब आप यौवन आरम्भ से गुज़र रहे हों, स्तनों के आकार वृद्धि में कुछ समय लगेगा. बार बार स्तनों की मालिश कीजिये, इससे स्तनों का आकार बढ़ता है और स्तन आकर्षक बनते हैं.

सॉफ्ट ड्रिंक, चाय, कॉफ़ी, शराब आदि का उपभोग टालिए, इससे स्तन वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
जंक फ़ूड मत खाइए. यह स्तन वृद्धि पर असर डालता है.
बहुत सारा पानी पीजिये और नियमित रूप से कसरत कीजिये.
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